Thursday, February 17, 2011

Reewaz !!!

                                     रिवाज़

रिवाजों की कब्र  में और कितने रिश्ते दफनाये जायेंगे
झूठी शान के इस कफ़न में और कितने सपने दबाये जायेंगे
अभी और गहरायेंगी जुल्मो की अमावस्या
जब तक न हटेगी की रिवाजों की काली बदलिया
अभी और गुलशन सम्शान बनाये जायेंगे
...
जब रिवाजों का पवित्र अमृत  ही,
विषधर की फुन्कार बने
जब प्रेम का पवन रिश्ता ही, 
हवस की एक pechan  बने
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे??? 
.... 
जब मर्यादा की अद्रश्य रेखा ही
सीता के लिए अभिशाप बने
जब श्रधा रूपी नारी ही
सति पर्था की भेट chde 
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे???
...
जब भूख में तडपते मासूम बचे   ही,रोटी के लिए हेवान बने
जब चंद सिको की खातिर ही ,सगे भाई एक दूजे पे वार करे
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे???
...
जब ६० साल के बुजुर्ग पिता का
उसका बेटा ही कर दे बहिष्कार
जब ४ साल की मासूम बची का 
उसका पिता ही कर दे बलत्कार
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे???
...

मर्यादा, रिश्ते,बंधन भुलाकर
प्यार को ही रिवाज़ बना दे
मंदिर, मस्जिद,church  हटाकर
प्यार को ही भगवान् बना दे

तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे???
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे?????

 

  

 




 




 



3 comments:

  1. ultimate thoughts,,,,,lets do some work on it.

    ReplyDelete
  2. These thoughts must be implemented in this poor society!!!!!!!!!!

    ReplyDelete