क्यों चुने नफरत के कांटे ? प्यार के क्यों फूल खिलाये ??
नफरत प्यार से क्या लेना देना, मुफ्त में क्यों दिमाग खपाए
जीवन की गाड़ी जेसे चले वेसी चलाये
इधर उधर क्यों ब्रेक लगाये
चलते जाये चलते जाये चलते जाये
प्यार से चल सके तो चलाते जाये,वरना नफरत का ही तेल पिलाये
निंदा,चुगली,वैर,इर्ष्य के सस्ते सस्ते पार्ट्स लगाये
पर
दुश्मनी,अकेलापन,भेदभाव जेसे स्टेशनो पे ही रुक जाये
तो केसे पूछे मंजिल पे,केसे सबको अपना बनाये???
प्रेम करे, प्रेम फलाये, खुद महके सबको महकाए
तो आओ हम भी मिल्झुल कर
चुन चुन के नफरत के कांटे प्यार के फूल खिलते जाये
नफरत,वैर,भेदभाव पे फेके धूल
प्रेम,समदृष्टि मित्रता के रखे टूल
"खिलौना" के भी बने रहे ये असूल
खुद महके सबको महकाए
प्रेम करे प्रेम फलाये
चुन चुन के नफरत के कांटे प्यार के फूल खिलते जाये




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