Monday, February 21, 2011

Vo Door Jata kyon Hain ???

                                                      वो दूर जाता क्यों हैं ???

जिनके पास जाना चाहे  वो दूर जाता क्यों हैं
लेकर अपनी बाहों में खंजर चुभाता क्यों हैं
फूलो सी बाते हैं उनकी खंजर साथ लाता क्यों हैं
जिनके पास जाना चाहे  वो दूर जाता क्यों हैं???

प्यार को लेकर चला था प्यार को बडाने चला था
शूल नफरत के जमाना  चुभाता  क्यों हैं
किसी का भला किया तो क्या बुरा किया मैने
भलाई का सिला बुराई से चुकता क्यों हैं
जिनके पास जाना चाहे  वो दूर जाता क्यों हैं???

प्यार करना जुर्म हैं ये जमाना सिखाता क्यों हैं
हमारी दोस्ती को ,हमारे विश्वास को २ दिन का बतलाता क्यों हैं
दोस्ती होती हैं सदा के लिए,विश्वास होता हैं सदा के लिए
फिर भी जमाना सचाई को झुट्लाता क्यों हैं
जिनके पास जाना चाहे  वो दूर जाता क्यों हैं???


दोस्ती को दो-सथ्यी  बनाना हमारा कर्म नही
विश्वास को विष का वास बनाना हमारा धरम नही
फिर भी हमारे विश्वास को १० दिन का बताता क्यों हैं
जिनके पास जाना चाहे  वो दूर जाता क्यों हैं???

उन्हें हमारी दोस्ती कबूल नही चलो यू ही सही
उन्हें हमारे विश्वास पर विश्वास नही चलो यू ही सही
पर दिल में उनकी जगह कोई और ले पाए
एसा हो पता भी नही
 वरना
बन के 'खिलौना'  कलम से ये सब लिख पाता क्यों हैं
जिनके पास जाना चाहे  वो दूर जाता क्यों हैं???





 






   



 



Saturday, February 19, 2011

Chun Chun Ke Nafrat Ke Kante, Pyar Ke Phool Khilate Jaye !!!

                चुन चुन  के नफरत के कांटे प्यार के फूल खिलाते जाये



अगर कोई समझ सके तो हमको भी ये समझाए
क्यों चुने नफरत के कांटे ? प्यार के क्यों फूल खिलाये ??
नफरत प्यार से क्या लेना देना, मुफ्त में क्यों  दिमाग खपाए
जीवन की गाड़ी जेसे चले वेसी चलाये
इधर उधर क्यों ब्रेक लगाये
चलते जाये चलते जाये  चलते जाये   

प्यार से चल सके तो चलाते जाये,वरना  नफरत का ही तेल पिलाये
निंदा,चुगली,वैर,इर्ष्य के सस्ते सस्ते पार्ट्स लगाये

पर

एसी गाड़ी मंजिल पे कभी न पहुच  पाए
दुश्मनी,अकेलापन,भेदभाव जेसे स्टेशनो पे ही रुक  जाये
तो केसे पूछे मंजिल पे,केसे सबको अपना बनाये???

जब कुछ  समझ न आया , पुरे मुर्शद ने ये समझाया  
प्रेम करे, प्रेम फलाये, खुद महके सबको महकाए

 तो आओ हम भी मिल्झुल कर
चुन चुन  के नफरत के कांटे प्यार के फूल खिलते जाये

प्यार को जिन्दगी का बनाये रुल
नफरत,वैर,भेदभाव पे फेके  धूल
प्रेम,समदृष्टि मित्रता के रखे टूल
"खिलौना" के भी बने रहे ये असूल
खुद महके सबको महकाए
प्रेम करे प्रेम फलाये
चुन चुन  के नफरत के कांटे प्यार के फूल खिलते जाये
 
    


        

Friday, February 18, 2011

Anjaan Pyar !!!

                                                अनजान प्यार

मेरी धडकनों में बसी जान हो तुम                                     
हर वक़्त, हर लम्हा मेरे साथ हो तुम
सांसो में बसे प्राण हो तुम
मेरे नाम की  पहचान हो तुम
मेरे प्यार से अनजान हो तुम
मेरे प्यार से अनजान हो तुम
...
बदलो में छुपी मेघ की फुहार हो तुम
कृषण की बांसुरी में प्रेम की च्न्कार हो तुम
राधा की पुकार हो तुम
मीरा की आस हो तुम
मेरे प्यार से अनजान हो तुम
मेरे प्यार से अनजान हो तुम
...
कवितायों में अलंकार हो तुम
किसी शायर का ख्वाब हो तुम
चकोर का चाँद हो तुम
चंचल हवा का एहसास हो तुम
मेरे प्यार से अनजान हो तुम
मेरे प्यार से अनजान हो तुम
...

मेरे जीवन का अंतिम अंजाम हो तुम
छोड़  तुम्हे न जी पाउँगा वो एहसास हो तुम
काश तुम भी कभी आ कर कहो मेरे लिए कुछ खास  हो तुम
....
मेरे प्यार से क्यों अनजान हो तुम
मेरे प्यार से क्यों अनजान हो तुम
मेरे प्यार से क्यों अनजान हो तुम???








 




 
 


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Thursday, February 17, 2011

Reewaz !!!

                                     रिवाज़

रिवाजों की कब्र  में और कितने रिश्ते दफनाये जायेंगे
झूठी शान के इस कफ़न में और कितने सपने दबाये जायेंगे
अभी और गहरायेंगी जुल्मो की अमावस्या
जब तक न हटेगी की रिवाजों की काली बदलिया
अभी और गुलशन सम्शान बनाये जायेंगे
...
जब रिवाजों का पवित्र अमृत  ही,
विषधर की फुन्कार बने
जब प्रेम का पवन रिश्ता ही, 
हवस की एक pechan  बने
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे??? 
.... 
जब मर्यादा की अद्रश्य रेखा ही
सीता के लिए अभिशाप बने
जब श्रधा रूपी नारी ही
सति पर्था की भेट chde 
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे???
...
जब भूख में तडपते मासूम बचे   ही,रोटी के लिए हेवान बने
जब चंद सिको की खातिर ही ,सगे भाई एक दूजे पे वार करे
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे???
...
जब ६० साल के बुजुर्ग पिता का
उसका बेटा ही कर दे बहिष्कार
जब ४ साल की मासूम बची का 
उसका पिता ही कर दे बलत्कार
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे???
...

मर्यादा, रिश्ते,बंधन भुलाकर
प्यार को ही रिवाज़ बना दे
मंदिर, मस्जिद,church  हटाकर
प्यार को ही भगवान् बना दे

तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे???
तो  क्यों न अब रिवाज़ बदल दे?????

 

  

 




 




 



Wednesday, September 22, 2010

Delhi बदनाम हुई CWG तेरे लिए..... Delhi झन्ड़ू बाम हुई CWG तेरे लिए




....15 अक्टूबर 2010...कॉमनवेल्थ गेम्स का आज आखिरी दिन था। क्या चकाचौंध थी, आतिशबाज़ी से सज़ा आसमान, स्टेडियम में हज़ारों थिरकते कदम, भारत का झंडा लिए हमारे खिलाड़ी जिन्होंने कमाल करते हुए पूरे 100 पदको का रिकॉर्ड कायम किया...एआर रहमान का जोशीला गाना और रौशनी से नहायी पूरी दिल्ली...पूरा शहर शेरा के पोस्टरों से सजा हुआ था...शेरा की टीशर्ट पहने बच्चे बड़े,शेरा की टोपी, शेरा का बैग, शेरा गुब्बारों पर शेरा मेट्रो की दीवारों पर, दिल्ली के बीआरटी कॉरिडोर में दौड़ती बसों पर...शेरा ही शेरा...भला हो इन कॉमनवेल्थ गेम्स का दिल्ली की तो शक्ल ही बदल गई है। पूरी दिल्ली मेट्रों से जुड़ गयी है, चौड़ी चिकनी सड़कों पर सरपट दौड़ती गाड़ियां, एक से दूसरे फ्लाएऔवर पर ट्रैफिक बिना गाड़ी चलाने का मज़ा। सफायी ऐसी की सिंगापुर को पछाड़ दे...बेहतरीन स्टेडियम, पांच सितारा होटल, गेम्स विलेज के आलीशान फ्लैट भई वाह...दिल्ली में रहने पर फख्र हो रहा है। माफ कर दीजिए शीलाजी, कलमाडी साहब...हम देख नहीं पाए आपका कमाल और बहुत बुरा भला कहा आपको। आपने तो जादू कर दिया, कहा जा रहा है कि इस आयोजन के बाद पर्यटकों की संख्या चार गुना बढ़ गई है। हमने तो सोचा है कि अब बेटे को निशानेबाज़ी सिखाएं, क्या खूबसूरत शूटिंग रेंज बनी है...

अरे ये क्या -ये साइरेन की आवाज़ कहां से रही है...ये मैं हूं कहां..सब कुछ धुंधला-धुंधला क्यों नज़र आ रहा है..ओह लगता है आंख लग गयी..

मिलती हैं तो कुछ एसी  ख्बरे
कॉमनवेल्थः खिलाड़ियों के बिस्तर पर सोते मिले कुत्ते (click here to see this link) 
दिखती हैं तो एसी  तस्वीरे 
जिस देश में महंगाई,भुखमरी,बाढ़-सूखा,गरीबी, आतंकवाद,पीड़ितों के पुनर्वास जैसी गंभीर समस्याएं हों वहां खेलो के आयोजन में दस हज़ार करोड़ लगा दिए जाने का क्या औचित्य है।
चलिए ये पैसा इन तमाम समस्याओं के हल में न लगा कर अगर देश में खेलों के सुधार पर लगाया जाता या खिलाड़ियों के प्रशिक्षण में इस्तमाल होता तो भी सही होता, लेकिन नहीं, खेलों के आयोजन की इतनी महत्वाकांक्षी योजना बनायी गयी कि अब लेने के देने पड़ रहे हैं। क्रिकेट को छोड़ तमाम दूसरे खेलों से जुड़े लोग स्पॉन्सर न मिलने का रोना रोते हैं तब तो पैसा होता नहीं देने के लिए लेकिन हां बॉलिवुड सितारों को समारोह में थिरकने के लिए पैसा है, खिलाड़ियों को ठहराने के लिए 2-2 करोड़ के फ्लैट बनाने के लिए पैसा है। महंगी ट्रेडमिल चौगुने दाम पर खरीदने के लिए पैसा है।
भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों का ज़मीर कैसे उन्हें झूठ पर झूठ बोलने की हिम्मत देता है? कौन सी ऐसी चीज़ छोड़ी गयी है जिस पर इन्होंने पैसा नहीं खाया? खेलों का आयोजन सिर्फ पैसा बनाने के लिए ही किया गया लगता है? फिर मैं कैसे खेलों को लेकर आशावान रहूं, गौरव महसूस करूं कि खेल मेरी दिल्ली में हो रहे हैं। 
तमाम देशों की सरकारें हिदायत दे रहीं हैं पर्यटकों को कि दिल्ली मत जाओ। सवाल पूंछ रही हैं कि डेंगू की रोकथाम के लिए क्या किया जा रहा है? सेना बुलायी गई है अब डेंगू की रोकथाम के लिए तो लगा लीजिए अंदाज़ा कि कैसे हालात हैं।
करा क्या जाए, बैठ कर तमाशा देखा जाए। और सपना सच होने का इंतज़ार किया जाए। पर सपने अगर सच होने लगे तो बात ही क्या थी। डर तो इस बात का है कि अभी तो जैसे-तैसे डेडलाइन के दबाव में काम हो रहा है। काम कैसा हो रहा है किस दर्जे का हो रहा है ये भी किसी से छुपा नहीं है। काम को बस खत्म करने की कोशिश की जा रही है जब खेल खत्म हो जाएगा और पैसा हजम हो जाएगा तब घटिया माल से बनी सड़कें फिर फटेंगी तब इन सड़कों को कौन भरेगा, छुपा हुआ मलबा कौन हटाएगा, डेंगू के मच्छर कौन भगाएगा- सेना या कछुआ छाप?

Delhi  बदनाम हुई CWG  तेरे लिए
Delhi  झन्ड़ू बाम हुई CWG तेरे लिए 



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Sunday, July 4, 2010

Raavan!!!

Is Maniratnam's Raavan was a good movie or not,????
To be true there can be a lot of opinions because when we go to see movie we all go with different mind set so there are many opinions also. Because after all its a movie . 
Its not about some science  fact that will either wrong or right.!!!
But we all have to agree that it gives a thought to youngistaan that Ram also may wrong.There is scene in movie when bira's(symbolic to Raavan) sister get raped by vikram's man in police station. It suddenly relate to part of ram charitra manas when laxman was in Jungle . Shrupnkha goes to them but laxman says you should go to the Ram & Ram says I am married  you should go to the Laxman.






.श्रुप्न्खा लक्ष्मण   के  पास जाती हैं और लक्ष्मण उसकी नाक काट देता हैं !!!   पर हिन्दू संस्कारो को अगर देखा जाये अगर कोई लड़की कोई एसा काम करती हैं तो कहा जाता हैं इसने तो हमारी नाक ही कटवा दी. कालिदास ने इस बात को अपने महाकाव्य में कुछ  इस तरीके से ब्यान किया की वो घिनोना कार्य सिर्फ अलंकारो में बन्ध के रह गया और किसी ने सोचा ही नही की राम भी गलत हो सकता हैं .
 आज हिन्दुस्तान उस वक़्त से गुजर रहा हैं जब एक मूवी में अगर मुंबई को बॉम्बे बोल दिया जाता हैं तो मूवी सिनेमाघरों तक आ ही नही पाती. इस माहोल में मणि रत्नम  ने एसे विषय पे फिल्म बनायीं और बिना किसी भारी आलोचना  के वो फिल्म पूरे  हिन्दुस्तान और श्री लंका में देशको तक पहुची .
और फिल्म में जिस खूबसूरती के साथ हिन्दुस्तान के  अनदेखे कोनो को दिखाया गया वो शानदार हैं आप महसूस ही नही कर पते की वो जगह हिन्दुस्तान की हैं जबकि वो सिर्फ केरला के जंगल हैं.

 और अंत में सीता राम के पास वापिस जाती हैं या नही ये  सवाल हर दर्शक के लिए छोड़   दिया जाता हैं .???

 

Disclaimer - The views are personal. The author will not be responsible for any of the malpractices. The author has no intention to harm or temper the identity and image of any Person,mythological character,  Thing, Institution, Organization, National Asset, Society, Religion, Caste, Creed and Race.If the above article is related to any person or thing, it is purely coincidental.

                                                                                                                                                                                 

Thursday, July 1, 2010

Swadharma!!!

What is Swadharma ???

Last Sunday I got chance to attend a workshop on Swadharma, It was a very good treat to me.              Actually, it is a very old thinking process in India.         Also describe in Gita.                                                Swadharma is actually a process in which we follow our inbuilt characteristic.  Every person has its own different characteristic.For example  if some one has ability to speak he will come out from lot of people and speak any way.                                               This is main factor India was having cast system in earlier times.                                                        It was divided in basically four divisions .Depending upon their Swadharma. people having their swadhrma which makes them aggressive or angry very soon.  they were called Shatriya.People who were keen to learn were divided as  Brahman. and so on.....
But as today we dont realy follow that system , we have to think how we can know our Swadharma & how we can use it.
After all our ultimate goal is to become happy, and following our swadharma makes us happy internally. May be  you like to write but you are an engineer and doing job & doing well making lots of money also.
But still there is some thing which makes us uncompleted !!!!!!
Now to know our swadharma we really need to know what is that exactly???? that may sound foolish because we will automatically follow it if it is a characteristic...

I can explain & justify my self by an example there are most of the people, We ask them are you happy from your job, they will say ok its not good but still we have to live!!!
Why it so???
ok, I give you answer!!!
It is because at the time of choosing some subjects we were not following our swadhrama & we take subjects what our parents want & that finally destroy our life.
we need to do swadhyay  or self analysis at that moment & then we will be completely happy from our life, & believe me we can do better in that field also.   

So, Lets think, do self analysis & start following our swadharma  so that we can feel good & do well in our life.